DISABILITY CAUSES AND REMEDIES

निःशक्तता : कारण एवम निवारण

1980 में W.H.0 के अनुसार - बीमारी -> क्षति -> अक्षमता-> निःशक्तता निःशक्तता के सामान्य कारण मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं - 1.वंशानुगत कारण 2. अर्जित कारण



वंशानुगत कारण - वंशानुगत कारणों में वे बीमारियां आती हैं जो हमें हमारे पूर्वजों सगे-संबंधियों या रक्त-संबंधियों से एक पीढी से द्सरी पीढी तक पहँचती हैं।

अर्जित कारण - अर्जित कारणों को हम तीन भागों में विभाजित करते हैं -

अ. जन्म से पूर्व

ब. जन्म के समय

स. जन्म के पश्चात

अ. जन्म से पूर्व - जन्म से पूर्व माँ की स्वयं की स्थिति अत्यधिक प्रभावी कारण होती है। यदि माँ की आयु 18 वर्ष से कम या 35 वर्ष से अधिक तथा शारीरिक एवम् मानसिक सिथतियाँ अनुकूल नहीं होने से भी गर्भस्थ शिशु के निशक्त होने के अवसर बढ़ जाते हैं।

  • चिकित्सक की सलाह बिना दवा व टीके लगाना
  • चिकित्सक की सलाह बिना एक्स-रे करवाने से।
  • संतलित आहार न मिलने की स्थिति में।
  • मादक पदार्थों का सेवन करने से।
  • गर्भ निरोधक या गर्भ नष्ट करने से संबंधित औषधि के प्रयोग से।
  • गर्भावस्था के दौरान चोट या आघात के कारण
  • गर्भावस्था के दौरान भारी व्यायाम या थकान के कार्य करने से
  • गर्भावस्था में माता को सदमा या मानसिक आघात से।
  • गर्भावस्था में संकामक रोग जैसे- मिजल्स, पीलिया, फ्लू आदि रोग होने से।
  • गर्भावस्था मे टिटनेस का टीका न लगने के कारण ।
  • गुणसूत्रीय असमानता
  • रक्त में RH Factor के कारण (यदि माँ का रक्त समूह RH निगेटिव है और गर्भस्थ शिशु का आरएच पॉजिटिव है तो इस अंतर के परिणामस्वरूप गर्भस्थ शिशु को पर्याप्त मात्रा में रक्त तथा प्राणवायु न मिलने से उसका विकास प्रभावित होता है ।)


जन्म के समय :- जन्म के समय दियांगता के कारण

  • अप्रशिक्षित दाई अथवा नर्स से प्रसव के कारण ।
  • प्रसव की अवधि लम्बी होना ।
  • प्रसव करवाने के लिए प्रयुक्त उपकरणों का असावधानी से प्रयोग ।
  • प्रसव समय पूर्व होने की स्थिति में अर्थात् 28-34 सप्ताह के बीच प्रसव होना ।
  • गर्भस्थ शिशु की गर्भ में सामान्य स्थिति न होना।
  • प्रसव के दौरान मॉ को दौरे पड़ना ।
  • प्रसव के तुरन्त उपरांत बालक का न रोना या मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी।
  • संक्रमण


जन्म के पश्चात :- जन्म के पश्चात दियांगता के कारण

  • बच्चे को पीलिया होना।
  • लम्बी अवधि तक तेज बुखार होना।
  • बच्चे को समय पर टीके न लगवाना। (MMR का टीका, टिटनेस, पोलियो आदि
  • सिर पर चोट आदि के कारण
  • दुर्घटना या चोट लगने से ।
  • दवा का प्रभाव आदि
  • सक्रमण के कारण
  • मस्तिष्क ज्वर
  • असंतुलित आहार के कारण या कुपोषण
  • प्रोटीन की कमी से होने वाले रोग, 0-6 आयु वर्ष में सूखा रोग व 1-3 आयु वर्ग में मराशम्स एवं क्वाशियोकोर, केसरी दाल के कुप्रभाव, विटामिन "ए" के कारण होने वाले दुष्प्रभाव केरोटोमलेशिया, कंजेक्टिवा जीरोसीस, कार्निया का सूखना, बिटोट बिंदु, रंतोधी विटामिन"डी" से रिकेटस व पिजन चेस्ट आदि।

नि: शक्तता निवारण उपाय नि: शक्तता को रोका जा सकता है यदि पर्याप्त सावधानी रखी जाए।

अ. प्रसव पूर्व देखभाल

  • निःशक्तता के बारे में मिथ्या धारणाएं दूर करना (अंधविश्वास आदि)
  • गर्भ धारण की आयु के संबंध में जानकारी देनी चाहिए कि गर्भ 18 वर्ष से कम तथा 35 वर्ष की अधिक आयु में गर्भ धारण नहीं करें।
  • निकट रक्त संबंधों (नजदीकी खून का रिश्ता) में विवाह संबंध न किये जायें ।
  • गर्भस्थ माता  को मानसिक आघात से दूर रखना ।
  • प्रसव पूर्व देखभाल के बारे में जागरूकता उत्पन्न करना।
  • पर्याप्त पोषण की व्यवस्था


ब. गर्भावस्था दौरान देखभाल

  • गर्भावस्था के दौरान उचित देखभाल एवं नियमित जॉच करवानी चाहिए ।
  • डॉक्टरी सलाह के बिना दवा का प्रयोग न करें।
  • शारीरिक व मानसिक थकान से बचें।
  • पौष्टिक आहार लेना चाहिए ।
  • चिकित्सक को सलाह क बिना एक्सरे न करवायें
  • पौष्टिक आहार लेना चाहिए ।


स. जन्म क पश्चात्

  • शीघ्र पहचान की जाए जिससे रोकथाम संभव हों।
  • बालकों के उचित शारीरिक व बौद्धिक विकास के लिए प्रेरणात्मक वातावरण उत्पन्न करें।
  • सभी टीके निर्धारित समय/अवधि में लगवाये जाएं।
  • पोषण पर पूर्ण ध्यान रखा जाए।
  • चिकित्सक की सलाह के बिना एक्सरे न करवाए ।
  • पहचान होने पर शौघ्र चिकित्सक से सलाह लें।






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