बौद्धिक अक्षमता की अवधारणा एवं वर्गीकरण
बौद्धिक अक्षमता की अवधारणा :- बोद्धिक अक्षमता एक स्थिति है जो विभिन्न ज्ञात एवं अज्ञात कारणों से मस्तिष्कीय कोशिकाओं के क्षतिग्रस्त होने के परिणामस्वरूप उत्पन्न होती है। इस कारण मानसिक विकास एवं शारीरिक विकास प्रभावित होता हैं। इससे प्रभावित विद्यार्थियों की गम्भीरता का स्तर एवं समस्याऐं अलग-अलग होती है। बौद्धिक मानसिक क्रियाओं में कमी को प्रदर्शित करती है।
बौद्धिक अक्षमता बौद्धिक क्रियाओं के औसत स्तर में कमी को दर्शाती है जिसके परिणामस्वरूप निम्न अनुकलित व्यवहारों में कमी दिखाई देती है-
सम्प्रेषण, स्वयं का रख-रखाव
सामुदायिक सेवाओं का उपयोग करना
कार्यात्मक शिक्षण
सामाजिक कौशल
स्व-निर्देशन
स्वास्थ्य एव सुरक्षा
किसी व्यक्ति को बुद्धिमान होने के लिए उसमे ध्यान देने की क्षमता, स्मरण शक्ति, अमूर्त, सोचना समस्या-समाधान एवं सामान्यीकरण की क्षमता होनी चाहिए लेकिन बौद्धिक अक्षमता वाले व्यक्तियों में इनकी कमी या क्षति होती है।
परिभाषा
० अमेरिकन एसोसियेशन ऑन मेन्टल डेफिसिएन्सी (1992) के अनुसार- "बौद्धिक अक्षमता सामान्य बौद्धिक क्रियाशीलता के औसत स्तर में कमी को बताता है जिससे अनुकलित व्यवहार प्रभावित होता है तथा यह विकासात्मक अवधि के दौरान प्रकट होती है।
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• PWD Act 1995 :- बौद्धिक अक्षमता किसी व्यक्ति के मस्तिष्क के अपूर्ण विकास की अवस्था है जो विशेष रूप से बुद्धि की असामान्यता के रूप में अभिलक्षित होती है।
• दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की परिभाषा—बौद्धिक दिव्यांगता से ऐसी स्थिति जिसकी विशेषता बौद्धिक कार्य (तार्किक, शिक्षण, समस्या समाधान) और अनुकलित व्यवहार दोनों में महत्त्वपूर्ण कमी होना हैं जिसके अन्तर्गत दैनिक सामाजिक और व्यवहार्य कौशलों की सीमा है।इसके अन्तर्गत दो उप दिव्यांगताएं भी हैं- SLD. ऑटिज्म ।
अनुकलित व्यवहार :- अनुकलित व्यवहार से तात्पर्य किसी व्यक्ति का वह सांस्कतिक समूह जिसमें व्यक्तिगत स्वतन्त्रता, सामाजिक जिम्मेदारियां जो उसकी आयु समूह से अपेक्षित हैं उसका निर्वहन करने की क्षमता या स्तर से है।
उदाहरण :- एक दस वर्ष के विद्यार्थी से उम्मीद करते हैं कि वह दैनिक जीवन के क्रियाकलाप सम्बन्धी कौशल (भोजन करना, ब्रश करना, शौच करना, स्नान करना आदि) व्यक्तिगत रूप से स्वयं करें। यदि वह इन कौशलों को व्यक्तिंगत रूप से स्वयं नहीं कर पा रहा है तो यह उसके अनुकूलित व्यवहार में कमी को प्रदर्शित करता है।
विकासात्मक अवधि :- गर्भावस्था से लेकर 18 वर्ष तक का समय विकासात्मक अवधि कहलाती है। बौद्धिक अक्षमता इसी अवधि में स्पष्ट रूप से उत्पन्न होती है।
बौद्धिक अक्षमता का वर्गीकरण :- बौद्धिक अक्षमता को मुख्यतः तीन भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है।
1 चिकित्सकीय
2. मनोवैज्ञानिक
3. शैक्षणिक ।
चिकित्सकीय वर्गीकरण लक्षणों के आधार पर. मनोवैज्ञानिक वर्गीकरण बद्धिलब्धि के आधार पर तथा शैक्षणिक वर्गीकरण वर्तमान स्तर पर आधारित होता है। इनमें मनोवैज्ञानिक व शैक्षणिक वर्गीकरण महत्त्वपूर्ण हैं।
1. चिकित्सकीय वर्गीकरण - इसमें डाउन सिंड्रोम, माइक्रोसेफेली, हाइड्रोसेफेली, ब्रेन-डेमेज, ऑटिज्म आदि पर चर्चा करेंगे।
2. मनोवैज्ञानिक वर्गीकरण - मनोवैज्ञानिक वर्गीकरण के अन्तर्गत मनोवैज्ञानिक परीक्षण के द्वारा व्यक्ति का आकलन कर उसका बौद्धिक स्तर (बुद्धिलब्धि) ज्ञात किया जाता है। उस बुद्धिलब्धि के आधार पर बौद्धिक अक्षमता को चार भागों में बांटा गया हैं -
क.सं वर्ग बुद्धिलब्धि
1. अल्प बौद्धिक अक्षमता (Mild Intellectual Disability ) 50-70
2. अति बौद्विक अक्षमता (Moderate Intellectual Disability ) 35-49
3. गंभीर बौद्धिक अक्षमता (Severe lntellectual Disabiity ) 34-20
4. अति गंभीर बौद्धिक अक्षमता (Profound Intellectual Disability ) 20 से नोचे
शैक्षणिक वर्गीकरण :— शैक्षणिक वर्गीकरण के अन्तर्गत इन बच्चों के क्रियाकलाप एवं कार्य सम्पादन करने के स्तर का आकलन किया जाता है। आकलन उपरान्त पायें गयें स्तर के आधार पर बौद्धिक अक्षमता को तीन भागों में वर्गीकृत किया जाता है जों इस प्रकार है-
- शैक्षणिक बौद्धिक अक्षमता (Educable lntellectual Disability ) - जिनकी बुद्धिलब्धि 50 से 70 के बीच होती हे।
- प्रशिक्षणीय बौद्धिक अक्षमता (Trainable lntellectual Disability) - जिनकी बुद्धिलब्धि 50 से 25 के बीच होती है।
- संरक्षणीय बौद्धिक अक्षमता (Custodial lntellectual Disabilty -जिनकी बुद्धिलब्धि 25 से कम होती है वे इस श्रेणी में आते हैं। इन बच्चों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। इनका गामक विकास बहुत पिछड़ा हुआ होता है।
